श्‍याम \भजन \- हार जाता हूं

हार जाता हूं मैं हार जाता हूं.… हर बार मैं खुद को लाचार पाता हूं, तेरे रहये क्यूं बाबा मैं हार जाता।। हर कदम क्या यूं ही मैं ठोकर खाऊंगा, बस इतना कह दे श्याम कभी जीत ना पाऊंगा, तेरी चौखट पे मं क्या बेकार आता हूं.... हर बार मैं खुद को लाचार पाता हूं।। क्यूं अपने वादे को तू भूला बिसरा है, हारा हुआ ये प्राणी चरणो मे पसरा है, तेरा वादा याद दिलाने तेरे द्वार आया हूं... हर बार मैं खुद को लाचार पाता हूं।। मेरे साथ खड़ा हो जा बस इतना ही चाहूं, जीवन कि बाजी फिर मैं हार नही पाऊं, अरमां ये हर्ष लिये हर बार आता हूं... हर बार मैं खुद को लाचार पाता हूं। तेरे रहते क्यूं बाबा मैं हार जाता हूं।।

कहां है ?

आजादी और स्‍वदेशी का नाता कहां है;
गांधी कि सूती अब देश में कहां है
पिछले 70 सालो से हर काम को नाम दिया जिसका..
हमें बतादो उनके उसूलो का भारत कहां हैआजादी और स्‍वदेशी का नाता कहां है....
70 सालों में भी हम स्‍वच्‍छ होने को तरस रहे
70 सालो में भी हम सिर्फ सरकारों पर बरस रहे
आजादी से पहले कुछ दिवानो ने अलख जगाई थी
जातिवाद से देश बडा है ये बाते बतलाई थी
लेकिन आजादी के 70 सालो में हम हार गये
देश से बडा जातिवाद है आजादी में बतला गये
वो जातिवाद से मुक्‍त हो भारत उनका सपना आज कहां है
हमें बतादो, आजादी और स्‍वदेशी का नाता कहां है

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