श्‍याम \भजन \- हार जाता हूं

हार जाता हूं मैं हार जाता हूं.… हर बार मैं खुद को लाचार पाता हूं, तेरे रहये क्यूं बाबा मैं हार जाता।। हर कदम क्या यूं ही मैं ठोकर खाऊंगा, बस इतना कह दे श्याम कभी जीत ना पाऊंगा, तेरी चौखट पे मं क्या बेकार आता हूं.... हर बार मैं खुद को लाचार पाता हूं।। क्यूं अपने वादे को तू भूला बिसरा है, हारा हुआ ये प्राणी चरणो मे पसरा है, तेरा वादा याद दिलाने तेरे द्वार आया हूं... हर बार मैं खुद को लाचार पाता हूं।। मेरे साथ खड़ा हो जा बस इतना ही चाहूं, जीवन कि बाजी फिर मैं हार नही पाऊं, अरमां ये हर्ष लिये हर बार आता हूं... हर बार मैं खुद को लाचार पाता हूं। तेरे रहते क्यूं बाबा मैं हार जाता हूं।।

धड़कने सांसे जवानी जिन्दगानी श्याम की

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धड़कने सांसे जवानी जिन्दगानी श्याम की,
धड़कने सांसे जवानी जिन्दगानी श्याम की,
हम को जो कुछ है मिला वो मेहरबानी श्याम की,
धड़कने सांसे जवानी जिन्दगानी श्याम की,
धड़कने सांसे जवानी जिन्दगानी श्याम की,
हम को जो कुछ है मिला वो  मेहरबानी श्याम की,
धड़कने सांसे जवानी जिन्दगानी श्याम की

चैन मिलता है हमे जो तेरा हम नाम ले,
आप चाहो तो मेरी चाहत की कश्ती थाम ले,
चैन मिलता है हमे जो तेरा हम नाम ले,
आप चाहो तो मेरी चाहत की कश्ती थाम ले,
है मेरी चाहत के दरियां मे रवानी श्याम की,
हम को जो कुछ है मिला वो  मेहरबानी श्याम की,
धड़कने सांसे जवानी जिन्दगानी श्याम की

आपके ही प्यार से है मंजिलों की दास्तां,
आपके दम से सितारे आपसे है आसमां,
आपके ही प्यार से है मंजिलों की दास्तां,
आपके दम से सितारे आपसे है आसमां,
जर्रे-जर्रे में है बाबा है कहानी श्याम की,
अंशु को जो कुछ है मिला वो  मेहरबानी श्याम की,
धड़कने सांसे जवानी जिन्दगानी श्याम की

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